रोना चाहता हुँ
मैं,
पर कभी रुवासी
नहीं आती
अपने रोने पर
ही, हँसी
आ जाती
दिल को जब
तसल्ली मिल पाती
गुड का कब
तक कोई शौकीन
होता है!!
मजा तो तब
है, जब जिंदगी
में कुछ नमकीन
होता हैं
गम तो हैं
....
पर मैं गमगीन
नहीं होता
गमो से दोस्ती
करली
अब धैर्य
नहीं खोता
उभ जाता हूँ
कभी
उबासी नहीं आती
लाख गमो के
आने पर भी
उदासी नहीं छाती...
मित्रो, गम तो हर किसी की ज़िन्दगी में आते हैं, हमारी ज़िन्दगी का एहम हिस्सा होते हैं, दुःख के बाद सुख का आंनद ही कुछ और होता हैं, चाहे जितने भी, जैसे भी गम हमारे जीवन में आएं हमे बिना धैर्य खोये हर गम से दोस्ती कर लेनी चाहिए .. तो गम भी गम नहीं लगेगा.. क्योंकि ज़िंदगी में मीठे के साथ नमकीन होना भी जरुरी है
